NEWS NOW

ALL NEWS Just ON ONE CLICK

अंग्रेजों के जमाने से लोगों के दिल में बसता है Parle-G, जानिए कैसा रहा इसका अब तक सफर

1 min read
Spread the love


पारले-जी (Parle-G)

भारत का शायद ही ऐसा कोई घर हो जहां पर पारले जी (Parle-G) नहीं आता होगा. आज भी ऐसे कई लोग है जिनकी चाय की शुरुआत पारले जी के साथ ही होती है. आइए जानते हैं इसका इतिहास:

नई दिल्ली. सुबह की चाय की चुस्कियों के साथ अगर बिस्किट मिल जाए तो उसका मजा दोगुना हो जाता है. बिस्किट एक ऐसी चीज है जो बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी को बेहद पसंद होते हैं. अगर बिस्किट की बात की जाए तो सभी की जुबा पर पहला नाम पारले-जी (Parle-G) का आता है. देश ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया में ये बिस्किट बेहद लोकप्रिय है. वहीं पारले-जी भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट भी है. भारत का शायद ही ऐसा कोई घर हो जहां पर पारले जी नहीं आता होगा. आज भी ऐसे कई लोग है जिनकी चाय की शुरुआत पारले जी के साथ ही होती है. सभी ने कभी ना कभी इस बिस्किट का स्वाद लिया होगा. ये बिस्किट बेहद ही सस्ता है उतना ही स्वादिष्ट है. आइए जानते हैं इसका इतिहास: पारले जी का इतिहास 82 साल पुराना है. इसकी शुरुआत मुंबई के विले पारले इलाके में एक बंद पड़ी पुरानी फैक्ट्री से हुई. साल 1929 की बात है जब एक व्यापारी मोहनलाल दयाल ने इस फैक्टरी को खरीदा. जहां पर उन्होनें कन्फेक्शनरी बनाने का काम शुरू किया. भारत के पहले कन्फेक्शनरी ब्रांड का नाम उसी जगह के नाम पर पड़ा. जब इस फैक्टरी की शुरुआत हुई उस समय इसमें केवल परिवार के सदस्य ही काम करते थे.इस फैक्ट्री के शुरू होने के 10 साल बाद 1939 में यहां बिस्किट बनाने का काम शुरू किया गया. साल 1939 में इन्होंने परिवार के इस बिजनेस को ऑफिशियल नाम दिया. पारले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बड़े पैमाने पर बिस्किट बनाया जाने लगा. सस्ते दाम और अच्छी क्वालिटी की वजह से यह कंपनी बहुत जल्द ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई. उस समय पारले बिस्किट का नाम पारले ग्लूको था. 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद अचानक देश में गेहूं की कमी हो गई. पारले को अपने ग्लूको बिस्किट का उत्पादन रोकना पड़ा क्योंकि गेहूं इसका मुख्य स्रोत था. उसके बाद कुछ समय तक इसका उत्पादन जौ किया जाने लगा. 80 के दशक में पारले ग्लूको से हुआ Parle-G
अस्सी के दशक तक बिस्किट को ग्लूको बिस्किट कहा जाता था लेकिन फिर इसका नाम बदल गया. इसे पारले जी नाम दिया गया. जी का मतलब है जीनियस, वहीं पारले शब्द मुंबई के ही सबअर्बन एरिया विले पार्ले से लिया गया. ग्लूको बिस्किट से पारले जी बनने के साथ ही बिस्किट के कवर पर बनी तस्वीर भी बदली. बता दें कि पहले वाले बिस्किट पर गाय और ग्वालन युवती बनी हुई थी. इसके पीछे संदेश था कि बिस्किट में दूध पीने जैसी ही एनर्जी मिलती है. पारले जी नाम रखने पर गाय और ग्वालन युवती हटा दी गई और उसकी जगह एक बच्ची की तस्वीर आ गई. पिछले साल लॉकडाउन में टुटा 80 साल पुराना रिकॉर्ड कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल लगे लॉकडाउन में पारले-जी बिस्किट ने एक नया रिकॉर्ड बनाया. पारले-जी बिस्किट की इतनी अधिक बिक्री हुई है कि पिछले 82 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है. कंपनी का कुल मार्केट शेयर करीब 5 फीसदी बढ़ा है और इसमें से 80-90 फीसदी ग्रोथ पारले-जी की सेल हुई है. अगर भारत की बात की जाएं तो आज देशभर में 130 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं और लगभग 50 लाख रिटेल स्टोर्स हैं.







#अगरज #क #जमन #स #लग #क #दल #म #बसत #ह #ParleG #जनए #कस #रह #इसक #अब #तक #सफर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *