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ऐसे करें कोविड जांच, जानें RTPCR और RAT में क्या है अंतर

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कोविड, कोरोना वायरस की बीमारी है जो SARS COV 2 (Severe Acute Respiratory Syndrome Corona Virus 2) की वजह से होता है. इसको यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह फेफड़े को बहुत ज़्यादा संक्रमित करता है. इस बीमारी का पहला मामला चीन में दिसम्बर 2019 में सामने आया था इसीलिए इसे कोविड-19 (COVID 19) नाम दिया गया. इससे पहले यह वायरस 2002 में ही पूर्वी एशिया के कुछ सीमित हिस्से में आया और उस समय इसे SARS COV 1 नाम दिया गया था. यह वायरस या तो DNA (डीऑक्सी-राइबो न्यूक्लेयिक एसिड) या RNA (राइबो न्यूक्लेयिक ऐसिड) वायरस हो सकता है. कोरोना वायरस RNA वायरस है. न्यूक्लेयिक एसिड इस वायरस के लिए मानव शरीर की आत्मा की तरह आनुवंशिक वस्तु है. इसलिए किसी शरीर में वायरस के संक्रमण का पता लागाने के लिए हमें वायरस की आत्मा का पता लगाना होता है. न्यूक्लेयिक एसिड या आत्मा का पता लगाने के लिए कुछ जांच किए जाते हैं. आइए हम यहां इसकी जांच के बारे में विस्तार से जानते हैं.. -कोविड-19 का पता लगाने के क्या तरीके हैं वायरस का पता लगाने के लिए दो तरीके अपनाए जा रहे हैं RTPCR और RAT (कार्ड टेस्ट). -RTPCR क्या है?RTPCR का अर्थ है – Reverse Transcriptase Polymerase Chain Reaction जिसे वास्तविक समय में किया गया PCR भी कहा जाता है. इस तरीके का प्रयोग RNA को बड़ा करने (जैसे इसकी कई कॉपी तैयार करने) के लिए होता है क्योंकि RNA में वायरस बहुत कम मात्रा में मौजूद होता है. इसे कई गुना इसीलिए बढ़ाया जाता है ताकि कम समय में वायरस की मौजूदगी का सही सही पता लागाया जा सके. चूंकी मशीन जांच का परिणाम देने में सिर्फ 3-6 घंटे ही लेता है लेकिन नमूना काफी अधिक संख्या में होने के कारण इसकी रिपोर्ट आने में समय लग जाता है. -पॉजिटिव और नेगेटिव रिपोर्ट का क्या मतलब है? सही पॉजिटिव का मतलब है कि जांच में वायरस का पता चला है और जो नमूना लिया गया उसमें वायरस वास्तविक रूप में मौजूद था. अगर जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव है तो इसका मतलब नमूने में वायरस मौजूद है. गलत पॉजिटिव का मतलब है जांच में वायरस का गलत पता लगाया गया है जबकि नमूने में वायरस मौजूद नहीं है (ऐसा नमूने के अशुद्ध होने के कारण हो सकता है) (टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव का मतलब है नमूने में वायरस मौजूद नहीं है). सही नेगेटिवे का अर्थ है कि जांच में वास्तविक रूप से वायरस की मौजूदगी का पता नहीं चला है (जांच रिपोर्ट नेगेटिव होने का मतलब है नमूने में वायरस मौजूद नहीं है). गलत नेगेटिव का मतलब है कि नमूने में वायरस होने के बावजूद जांच में इसका पता नहीं चल पाया है (जांच रिपोर्ट नेगेटिव होने का मतलब है नमूने में वायरस मौजूद है). इस तरह, पॉजिटिव RTPCR जांच का मतलब हुआ वायरस की मौजूदगी लेकिन नेगेटिव रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि वायरस आवश्यक रूप से मौजूद नहीं है. इसीलिए एक बार फिर RTPCR जांच कराने को कहा जाता है.
-RTPCR कितना संवेदनशील होता है? संवेदनशील का मतलब है वायरस का पता लगाने की उसकी क्षमता. उदाहरण के लिए जांच की यह क्षमता जो सही पॉजिटिव परिणाम दे सके. नाक और गले से लिए गए स्वाब नमूने में RTPCR जांच से SARS COV 2 की मौजूदगी का पता लगाना 85% तक सही होता है. इसका मतलब यह हुआ कि 100 नमूने में से 85 में वह पॉजिटिव परिणाम देता है. इस बात की संभावना हो सकती है कि शेष 15 नमूने में वायरस मौजूद हो सकते हैं पर RTPCR जांच में इसका पता नहीं चल पाया (गलत नेगेटिव रहा). उस स्थिति में अगर RTPCR जांच दोबारा कराई जाती है तो हो सकता है कि वायरस का पता चल जाए. इसीलिए पहले RTPCR जांच के नेगेटिव रहने पर इस जांच को दोबारा कराने का सुझाव दिया जाता है. -RTPCR जांच कितना विशिष्ट है? विशिष्ट का मतलब है कि नमूने में वायरस अगर मौजूद नहीं है तो जांच से इस बात का पता लगना. उदाहरण के लिए सही नेगेटिव जांच परिणाम. RTPCR जांच का नाक और गले से लिए गए स्वाब में SARS COV 2 वायरस का पता लगा पाने की विशिष्टता लगभग 98% है. इसका अर्थ यह हुआ कि 100 नमूने में से सिर्फ दो ही नमूने ऐसे हो सकते हैं जिसमें गलत पॉजिटिव परिणाम आए, मतलब यह कि नमूने में वायरस नहीं होने के बावजूद जांच से वायरस होने की बात का पता चला. चूंकी RTPCR की विशिष्टता अच्छी है, इसलिए पॉजिटिव जांच रिपोर्ट को सही पॉजिटिव माना जाता है और यह भी माना जाता है कि उस व्यक्ति में संक्रमण है. इसलिए इस स्थिति में दोबारा जांच कराने को नहीं कहा जाता है. -RTPCR जांच में CT वैल्यू का क्या मतलब है? CT का मतलब है चक्र सीमा (Cycle Threshold). इसका अर्थ हुआ कि कितनी बार घुमाने के बाद वायरस का पता चलता है. CT वैल्यू जितना ही कम होगा उस मरीज के शरीर में वायरस की मौजूदगी उतनी ही अधिक होगी क्योंकि कुछ ही चक्कर लगाने में वायरस का पता चल जाता है. -क्या CT वैल्यू ज्यादा होने का मतलब है बीमारी का अधिक गंभीर होना? नहीं, CT वैल्यू और बीमारी के गंभीर होने के बीच कोई संबंध नहीं है. CT वैल्यू सिर्फ यह बताता है कि मरीज के शरीर में ज्यादा वायरस है और इस वजह से वह ज्यादा संक्रमणकारी है, मतलब ऐसा मरीज ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है. इसमें 24 को सीमा माना गया है, जिस मरीज में CT वैल्यू 24 से कम होता है उसके बारे में माना जाता है कि वह 24 से ज़्यादा CT वैल्यू वाले की तुलना में इस बीमारी को ज्यादा फैला सकता है. -RAT क्या है? RAT का अर्थ है रैपिड एंटीजेन टेस्ट (Rapid Antigen Test) त्वरित एंटीजेन जांच. RTPCR के उलट RAT में स्वाब में प्रोटीन का पता लगाया जाता है जबकि RTPCR में RNA का पता लगाया जाता है. -RTPCR की तुलना में RAT के फ़ायदे? जैसा कि नाम से ही पता चलता है, RAT एक त्वरित जांच है और इससे जांच परिणाम 15-30 मिनट में ही मिल जाता है. -RAT की तुलना में RTPCR के फ़ायदे? RAT की संवेदनशीलता 50 % से भी कम है, इसलिए अगर किसी मरीज में संक्रमण का लक्षण है और उसका RAT जांच नेगेटिव है तो उस मरीज को नेगेटिव नहीं माना जा सकता और उसे RTPCR जांच कराने की ज़रूरत है. -इन जांचों के लिए शरीर से कैसे नमूने लिए जाते हैं? नाक और गले से स्वाब के नमूने की ज़रूरत होती है. -ये जांच कब कराई जानी चाहिए? ज्यों ही आपके शरीर में इसका लक्षण प्रकट होता है या आप किसी कोविड मरीज़ के संपर्क में आते हैं. -इस जांच को दोबारा कब कराना चाहिए? अगर मरीज में लक्षण नहीं है और वह ठीक हो चुका है तो दोबारा जांच कराने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि जांच में वायरस का पता लगाया जाता है, बीमारी का नहीं. इसलिए अगर मरीज ठीक हो चुका है तो अगर जांच पॉजिटिव भी आता है तो इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए. अगर आपका नियोक्ता काम पर लौटने के लिए आपके नेगेटिव होने के प्रमाण के रूप में इसकी जांच के लिए कहता है, तो जांच दुबारा कराया जा सकता है या अगर यह यात्रा करने के लिए जरूरी है. (डॉ. निकेत राय, MBBS MD, Maulana Azad college Delhi)

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