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कोरोना का असर, Credit Suisse ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ रेट का अनुमान

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क्रेडिट सुइस ने दूसरी छमाही में मजबूत रिकवरी का अनुमान जताया है.

क्रेडिट सुइस ने दूसरी छमाही में मजबूत रिकवरी का अनुमान जताया है.

अन्य ब्रोकरेज कंपनियां और विश्लेषक भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर को देखते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमानों को कम कर रहे हैं.

मुंबई. कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर देश की इकोनॉमी (Economy) पर भी नजर आने लगा है. स्विट्जरलैंड की ब्रोकरेज कंपनी क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का इकोनॉमी और उपभोक्ता धारणा (Consumer Sentiment) पर पड़ने वाले असर का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बाजार मूल्य पर भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट के अनुमान को 1.5 से 3.0 फीसदी तक घटाकर इसके 13 से 14 फीसदी रहने की संभावना जताई है. दूसरी छमाही में मजबूत रिकवरी की उम्मीद जताई हालांकि, वित्तीय सेवा देने वाली कंपनी ने दूसरी छमाही में मजबूत रिकवरी का अनुमान जताया है. इसका कारण लॉकडाउन का टैक्स कलेक्शन पर सीमित प्रभाव पड़ना है. क्रेडिट सुइस एशिया पैसेफिक के लिए इक्विटी रणनीति मामलों के सह-प्रमुख और भारत इक्विटी रणनीतिकार नीलकंठ मिश्रा ने पिछले महीने कहा था कि 2021-22 में महामारी के कारण वास्तविक जीडीपी ग्रोथ रेट 8.5 से 9 फीसदी रह सकती है. 13 से 14 फीसदी रह सकती है जीडीपी ग्रोथ रेटक्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट इंडिया के जितेन्द्र गोहिल और प्रेमल कामदार ने गुरुवार को एक रिपोर्ट में कहा, ”हमारी वृहत आर्थिक रणनीतिक टीम का अनुमान है कि महामारी से जुड़ी पाबंदियों के कारण जीडीपी पर प्रभाव करीब 1.50 फीसदी रह सकता है. अगर राज्यों के स्तर पर लगाई गई पाबंदियां लंबे समय तक रहती है, तो असर 3.0 फीसदी तक हो सकता है. ऐसे में इन सबके बावजूद बाजार मूल्य पर आधारित जीडीपी ग्रोथ रेट 13 से 14 फीसदी रह सकती है.” ये भी पढ़ें- Gold Price Today: फिर बढ़ गई सोना-चांदी की कीमतें, खरीदारी से पहले देखें 10 ग्राम गोल्‍ड का नया भाव रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर ‘लॉकडाउन’ से वस्तुओं की आवाजाही और आपूर्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. इससे मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में रिकवरी में वक्त लगेगा. पर, दूसरी छमाही से मांग बढ़ने से वृद्धि को गति मिलने की उम्मीद है. लेकिन यह भी सचाई है कि वायरस अब गांवों में फैल रहा है जो चिंता का विषय है.
एक अन्य सकारात्मक चीज मानसून अच्छा रहने की भविष्यवाणी है. अगर यह सही रहा तो लगातार तीसरा साल होगा जब बारिश अच्छी होगी. यह कृषि  इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर है और इससे ग्रामीण मांग में तेजी आने की उम्मीद है.





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