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क्यों ‘world’s pharmacy’ India को अपने लिए ही कम पड़ रही कोरोना वैक्सीन डोज ?

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नई दिल्ली. पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से कहा था कि उनके देश के पास पर्याप्त मात्रा में कोविड-19 वैक्सीन है, जिससे पूरी मानवता की मदद की जा सकती है. इस साल भारत अपने लोगों को ही कोविड-19 वैक्सीन (Covid) लगाने में असमर्थता का सामना कर रहा है. देश में कोरोना संक्रमण का सेकंड वेव (Second wave) तेजी से पैर पसार रहा है. पिछले करीब कई दिनों से रोजाना मरने वालों लोगों की संख्या 4000 के पार बनी हुई है. दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता (largest vaccine maker) देश के रूप में भारत से दुनिया को यह उम्मीद रही है कि कोविड-19 के वैक्सीनेशन (Covid Vaccination) में यह बड़ी भूमिका निभा सकता है. वास्तव में ओवरकॉन्फिडेंस, योजना बनाने में कमी और खराब किस्मत की वजह से ऐसा नहीं हो पाया है. अनुमान लगाने में फेल भारत में अधिकारी कई वजहों से कोरोना संक्रमण की असल स्थिति को भांपने में असफल रहे. भारत में जिस गति से वैक्सीन को मंजूरी दी गई, वह दुनिया की तुलना में धीमी थी. भारत दुनिया के उन तमाम देशों में शामिल था जो यह मानकर चल रहा था कि साल 2021 के मध्य से पहले कोविड वैक्सीन (Covid vaccine) तैयार नहीं हो पाएगी.यह भी पढ़ें- इन तीन वजहों से महिलाओं के नाम घर खरीदना फायदेमंद होता है, जानिए विस्तार से कई देशों ने दिसंबर में ही वैक्सीन बनाना और अपने लोगों को लगाना शुरु कर दिया. इससे भारत पर जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने और लोगों को लगाने का दबाव बढ़ा. जनवरी 2021 में भारत ने दो वैक्सीन को मंजूरी दे दी, लेकिन घरेलू और विदेशी बाजार के हिसाब से यह वैक्सीन की आपूर्ति करने की योजना नहीं बना पाया. प्रोडक्शन संबंधी दिक्कतें
भारत में कोविड-19 बनाने वाली दो प्रमुख कंपनियां हैं. सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) एस्ट्रेजनेका की कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) बना रही है. भारत बायोटेक खुद विकसित की गई वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin) बना रही है. भारत ने पिछले साल दुनियाभर की कंपनियों को वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए आमंत्रित किया, लेकिन उन्हें नियामक से मंजूरी मिलने में बहुत देर लग गई. यह भी पढ़ें- इंडियाबुल्स वेंचर पर बड़ी कार्रवाई, SEBI ने कंपनी के अधिकारियों पर लगाया 1.05 करोड़ का जुर्माना भारत की इन दोनों कंपनियों और सरकार ने यह सोचा कि जब तक दूसरी कोरोनावायरस टीके (Covid vaccine) को मंजूरी मिलेगी, तब तक वह पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन (Covid vaccine) की डोज बना लेंगे. दोनों कंपनियों के लिए हालांकि वैक्सीन प्रोडक्शन की कैपेसिटी बढ़ाना मुश्किल साबित हुआ. सिरम इंस्टीट्यूट पुणे कहा था कि जनवरी में वह हर महीने 10 करोड़ डोज बनाने लगेंगी. उन्होंने इसे भारत और दुनिया भर में बांटने का तरीका भी बता दिया. पिछले महीने भारत सरकार ने राज्यों से कहा है कि सिरम इंस्टीट्यूट महीने में छह करोड़ डोज बना रही है. भारत बायोटेक ने कहा था कि साल 2021 में कंपनी 70 करोड़ डोज बनाने की क्षमता को लेकर काम कर रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि कंपनी हर महीने सिर्फ एक करोड़ डोज बना रही है. आगे कैसी है राह? भारत में कोरोना संक्रमण के रोजाना चार लाख के करीब मामले आ रहे हैं. भारत सरकार ने 1 मई से सभी वयस्कों के लिए कोरोना टीकाकरण (Covid vaccination) अभियान शुरू किया है. इसके बाद देश में टीके की मांग बढ़ गई है जबकि वैक्सीनेशन सेंटर पर टीके की कमी की खबरें आने लगी है. अब तक भारत में 19.6 करोड़ कोरोना टीका (Covid vaccine) उपलब्ध है जिसमें एक करोड़ टीका UN के कोवैक्स प्रोग्राम से मिला है. देश में अब तक सिर्फ चार करोड़ लोग पूरी तरह से कोरोना टीका (Covid vaccine) लगवा चुके हैं. 10 करोड़ लोगों को कोरोना टीके (Covid vaccine) की पहली डोज लग चुकी है. वास्तव में भारत में 10 अप्रैल को रोजाना 36 लाख लोगों को कोरोना टीका लग रहा था जो 20 मई को घटकर 14 लाख पर आ गया है. अगर टीके की कमी से निबटने की बात करें तो भारत ने रूस की स्पूतनिक V को भी को मंजूरी दे दी है और पिछले हफ्ते ही इसकी दो लाख डोज भारत पहुंच चुकी है. सरकार को उम्मीद है कि कोरोना टीके (Covid vaccine) की आपूर्ति जल्द सुधर सकती है और अगस्त से दिसंबर के बीच देश में टीके के 2 अरब डोज तैयार हो सकते हैं.



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