August 6, 2021

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जब शाहरुख खान की DDLJ ने बदल दी थी सुशांत सिंह राजपूत की जिंदगी, एक्टर ने सुनाया था किस्सा

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सुशांत के निधन के पूरे एक साल हो चुके हैं. फाइल फोटो

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) आज भले ही हमारे साथ न हों, लेकिन उनकी यादें आज भी हमारे दिलों में बसी हुई है. साल 2017 में सुशांत सिंह राजपूत ने HT से अपने इंजीनियरिंग छात्र से अभिनेता बनने तक की अपनी यात्रा के बारे में बात की थी.

नई दिल्ली. दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) आज भले ही हमारे साथ न हों, लेकिन उनकी यादें आज भी हमारे दिलों में बसी हुई है. आज यानी 14 जून को सुशांत के निधन के पूरे एक साल हो चुके हैं. सुशांत पढ़ाई लिखाई में किसी से पीछे नहीं थे. उन्हें दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पास-आउट होकर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए से स्कॉलरशिप हासिल की थी. हालांकि, उन्होंने अभिनेता बनने के लिए वह सब कुछ पीछे छोड़ दिया.

साल 2017 में सुशांत सिंह राजपूत ने HT से अपने इंजीनियरिंग छात्र से अभिनेता बनने तक की अपनी यात्रा के बारे में बात की थी. इसमें उन्होंने यह भी बताया था कि कैसे शाहरुख खान (Shahrukh Khan) का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा, न केवल एक स्टार के रूप में बल्कि उनके इस भ्रम को भी दूर किया कि वह कौन हैं.

सुशांत सिंह राजपूत को इस दुनिया से गए हुए सालभर हो गए हैं (फाइल फोटो)

सुशांत (Sushant Singh Rajput) कहते हैं, ‘ऐसा नहीं था कि मैं बॉलीवुड से प्रभावित नहीं था. मैं शाहरुख खान का बहुत बड़ा फैन था. मुझे याद है कि मैं दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (डीडीएलजे) देख रहा था और सोच रहा था कि ये कितना अच्छा है. वह एक महान कलाकार हैं, लेकिन इसने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं किया. बल्कि, शाहरुख ने मुझे इस भ्रम को दूर करने में मदद की कि मुझे क्या होना चाहिए.’सुशांत ने आगे कहा, ‘यह 90 के दशक की शुरुआत हो रही थी, अर्थव्यवस्था अभी अभी अपनी गती पकड़ रही थी. हम पहली बार कोक के डिब्बे देख रहे थे, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड आ रहे थे, और मैं मोहित हो उठा था. फिर भी मैं भ्रमित, मुझे नहीं पता था कि मॉर्डन कल्चर को अपनाना है या अपनी संस्कृति के प्रति वफादार रहना है. इस समय डीडीएलजे आई, मैं छठी कक्षा में था, राज ने मुझे दिखाया कि बीयर पीना कूल है, लेकिन फिर उसने सिमरन के पिता की स्वीकृति का भी इंतजार किया. वहां एक संतुलन था. यह एक महत्वाकांक्षी भारत और अपनी संस्कृति को बनाए रखने की कोशिश कर रहे भारत के आदर्श विवाह का उदाहरण था.’







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