September 23, 2021

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जस्टिस आर एफ नरीमनः SC के वह जज, जिनके लिए बदल गया था नियम, जानें- किस्सा

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सुप्रीम कोर्ट के जज नियम के अनुसार अपने 65वें जन्मदिन के एक दिन पहले रिटायर होते हैं। आज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन का जन्मदिन है और इस नियम के अनुसार वह गुरुवार 12 अगस्त को अपने पद से रिटायर हो गए। उनकी विदाई के मौके पर CJI एनवी रमण भावुक हो गए, उन्होंने कहा कि हम आज भारतीय ज्यूडिशियरी सिस्टम का एक शेर खो रहे हैं। जस्टिस आर एफ नरीमन के कार्यकाल को निगाह डालें तो उनकी बुद्धिमानी और तेज तर्रार बर्ताव का अंदाजा लग जाता है।

जस्टिस नरीमन का जन्म 13 अगस्त 1956 को हुआ था। 1993 में वह सीनियर एडवोकेट बने और 27 जुलाई 2011 को उन्हें भारत के सॉलीसिटर जनरल पद पर नियुक्त किया गया। सात जुलाई 2014 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था और 12 अगस्त वह अपने पद से रिटायर हो गए।

अपने करियर में दिए बड़े फैसले: अपने करियर में उन्होंने कई बड़े फैसले दिए जिनकी चर्चा कई दिनों तक होती रही, जिसमें केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति, निजता को मौलिक अधिकार घोषित करना और सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाने जैसे कई ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं। जज की कुर्सी पर बैठने के दो महीने बाद जुलाई 2014 में जस्टिस नरीमन ने एक फैसला लिखा था जिसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। इस फैसले में उन्होंने मौत की सजा पाने वाले आरोपी की रिव्यू याचिका को खुली अदालत में सुनवाई करने की वकालत की थी।

वकील से बने सुप्रीम कोर्ट के जज: कानूनी तौर पर हाईकोर्ट के जस्टिस को ही सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाता है लेकिन नरीमन के लिए यहां भी नियमों को किनारे करना पड़ा। उन्हें सीधे वकालत करते हुए जस्टिस बना दिया गया। नियमों से अलग हटकर विशेष तरह से जज बनने वाले जस्टिस नरीमन पांचवें वकील थे। उनके अलावा जस्टिस य़ूयू ललित और इंदु मल्होत्रा भी इसी तरह सीधे जज बने थे।

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