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September 21, 2021

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पसंदीदा हाथी की मौत से टूट गए थे माधो राव सिंधिया, पीने लगे थे बेतहाशा सिगरेट; हाथ में सिगरेट का टुकड़ा पकड़े हुआ था निधन

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साल 1886 में जब जयाजीराव सिंधिया का निधन हुआ तब उनके बेटे माधो राव महज 10 साल के थे। पिता के निधन के बाद वे सिंधिया राजघराने की गद्दी पर बैठे। अपने प्रशंसकों के बीच माधो महाराज के नाम से चर्चित माधो राव एक तरीके से सिंधिया परिवार के पहले मॉडर्न महाराजा थे। वे विदेश गए और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एलएलडी (डॉक्टर ऑफ लॉज की पढ़ाई की।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राशिद किदवई अपनी हालिया किताब “द हाउस ऑफ सिंधियाज: अ सागा ऑफ पावर, पॉलिटिक्स एंड एंट्रिग” में लिखते हैं कि माधो राव अक्सर वेश बदलकर ग्वालियर की गलियों में यह पता लगाने के लिए घूमते थे कि उनका प्रशासन कैसा काम कर रहा है। लोगों की क्या राय है।

तीन घटनाओं से टूट गए थे महाराजा: किदवई लिखते हैं, ‘माधो महाराज थोड़ा वहमी स्वभाव के भी थे और अंधविश्वास में भी भरोसा करते थे। एक बार ऐसा मौका आया जब एक के बाद एक तीन घटनाओं से वे बुरी तरह परेशान हो गए। पहली घटना, उनके पसंदीदा हाथी की किले से तोप ले जाने के दौरान मौत हो गई। दूसरी, उनका हथियार रखने वाला कोट ‘माही मारताब’ क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे महाराजा बहुत पवित्र मानते थे।

तीसरी, ग्वालियर के इमामबाड़े में मुहर्रम के ताजिया में आग लग गई। आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई। दरअसल, कई सालों से इस ताजिया की अगुवाई सिंधिया परिवार ही करता आ रहा था और यह राज परिवार की परंपरा का हिस्सा था। आनन-फानन में दूसरी व्यवस्था की गई। लेकिन इस घटना से माधो महाराज के दिलो-दिमाग पर बेहद बुरा असर पड़ा। उन्होंने कहा था, ‘ताजिया नहीं जला बल्कि वे खुद जल गए’।

गम में पीने लगे सिगरेट: इन घटनाओं से दुखी माधो राव की आंखों में आंसू आ गए थे। गम में डूबे महाराजा बेतहाशा सिगरेट पीने लगे। हालांकि उनके हाकिम (डॉक्टर) ने इससे साफ़ मना किया था। इसी बीच, साल 1925 की गर्मियों के दौरान ब्रिटेन के राजा ने माधो महाराज को इंग्लैंड आमंत्रित किया। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने यूरोप जाने का निर्णय किया। यूरोप दौरे के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई और उन्हें पेरिस के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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