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फरवरी में 11.22 लाख को मिला रोजगार, EPFO में फरवरी के मुकाबले घटी सब्सक्राइबर की संख्या

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ईपीएफओ

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वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान ईपीएफओ (EPFO) ने कुल 77.08 लाख नए सदस्यों को जोड़ा जबकि एक साल पहले की अवधि में यह संख्या 78.58 लाख थी.

नई दिल्ली. कोरोना महामारी की चुनौतियों के बीच फरवरी में 12.37 लाख लोगों को रोजगार मिला है. दरअसल, इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन यानी ईपीएफओ (Employees’ Provident Fund Organisation) से इस साल मार्च में शुद्ध रूप से 11.22 लाख कर्मचारी जुड़े. यह संख्या इसी साल फरवरी में ईपीएफओ (EPFO) से जुड़े 11.28 लाख कर्मचारियों के मुकाबले कम है. नियमित वेतन पर रखे जाने वाले कर्मचारियों के गुरुवार को जारी आंकड़े (Payroll Data) से यह पता चला. यह आंकड़ा कोरोना महामारी के बीच संगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिति को बताता है. FY21 में ईपीएफओ से जुड़े 77.08 लाख नए सदस्य वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान ईपीएफओ ने कुल 77.08 लाख नए सदस्यों को जोड़ा जबकि एक साल पहले की अवधि में यह संख्या 78.58 लाख थी. श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”ईपीएफओ से वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान कुल 77.08 लाख नए सब्सक्राइबर जुड़े. अस्थायी पेरोल आंकड़े के अनुसार ईपीएफओ ने मार्च, 2021 में 11.22 लाख नए सब्सक्राइबर जोड़े.”बयान में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद शुद्ध रूप से वित्त वर्ष 2020-21 में जुड़े 77.08 लाख सब्सक्राइबर की संख्या इससे पिछले साल के लगभग बराबर ही है. वित्त वर्ष 2020-21 के पेरोल आंकड़े के तिमाही विश्लेषण से पता चलता है कि नियमित वेतन पर रखे जाने वाले कर्मचारियों की संख्या में दूसरी तिमाही से लगातार सुधार हो रहा है. पहली तिमाही में कोरोना वायरस महामारी के कारण असर पड़ा था. चौथी तिमाही में 33.64 लाख नए सब्सक्राइबर ईपीएफओ से जुड़े बयान के अनुसार चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च, 2021) के दौरान सर्वाधिक 33.64 लाख नए सब्सक्राइबर ईपीएफओ से जुड़े. यह तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2020) के मुकाबले 37.44 फीसदी वृद्धि को बताता है.
मार्च महीने में जुड़े शुद्ध रूप से 11.22 लाख नए सब्सक्राइबर में से 7.16 लाख नए सब्सक्राइबर पहली बार ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आए. करीब 4.06 लाख अंशधारक ईपीएफओ के दायरे से बाहर हुए और उसके बाद ईपीएफओ के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों से जुड़कर फिर उससे जुड़े. इन सदस्यों ने ईपीएफओ से पूरा पैसा निकालने के बजाए अपनी सदस्यता बरकरार रखी.







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