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मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस के 397 नए मामले

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Image Source : PTI
मध्य प्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से प्रदेश में 35 और व्यक्तियों की मौत हुई है।

भोपाल: मध्य प्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से प्रदेश में 35 और व्यक्तियों की मौत हुई है। प्रदेश में अब तक इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 8,510 हो गयी है। राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी के 397 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित पाए गए लोगों की कुल संख्या 7,87,572 तक पहुंच गयी। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में तीन महीने से अधिक समय बाद 400 से कम कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 52 जिलों में से तीन जिलों भिण्ड, टीकमगढ़ एवं शाजापुर में पिछले 24 घंटों में एक भी नया कोरोना संक्रमित व्यक्ति नहीं पाया गया। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में शुक्रवार को कोविड-19 के 117 नये मामले इंदौर में आये, जबकि भोपाल में 97 एवं जबलपुर में 34 नये मामले आये। अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में कुल 7,87,572 संक्रमितों में से अब तक 7,73,516 मरीज स्वस्थ हो गये हैं और 5,447 मरीजों का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को कोविड-19 के 1,240 रोगी स्वस्थ हुए हैं।

वहीं, कोविड-19 के प्रकोप के चलते इंदौर के 180 से ज्यादा बच्चों के सिर से कमाऊ अभिभावक का साया उठ गया और अब इन नौनिहालों की पढ़ाई के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कक्षा छह में पढ़ने वाला कुशलचंद्र पटेल भी इनमें शामिल हैं जो अपनी माता कल्याणी पटेल के साथ शुक्रवार को इंदौर लोकसभा क्षेत्र के सांसद शंकर लालवानी से मदद के लिए मिलने आया था। महामारी के कारण अपने पति को खोने वाली महिला की गोद में उनका दुधमुंहा बेटा भी था। 

कल्याणी ने बताया, “मेरे पति की छह मई को कोविड-19 से मौत हो गई थी। वह एक निजी कम्पनी में काम करते थे। मैं अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए मदद चाहती हूं।” कुशलचंद्र जैसे बच्चों की सहायता के लिए अभियान शुरू करने वाले लोकसभा सांसद लालवानी ने बताया, “अब तक हमसे उन 182 बच्चों के परिजनों ने मदद के लिए संपर्क किया है जिनके माता या पिता को कोरोना वायरस के क्रूर हाथों ने उनसे छीन लिया। इन दिवंगत लोगों की कमाई से ही बच्चों का लालन-पालन हो रहा था।” 

उन्होंने बताया, “ये बच्चे उसी स्कूल में आगे की पढ़ाई करना चाह रहे हैं जिसमें वे अपने कमाऊ अभिभावक के निधन से पहले पढ़ रहे थे। स्कूलों के प्रबंधन से इन बच्चों की फीस माफ करने को लेकर बात की जा रही है। वरना हम सामाजिक संगठनों की मदद से इनकी फीस भरेंगे।” सांसद ने बताया कि इन बच्चों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 

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