March 8, 2021

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स्वंत्रत भारत में पहली बार किसी महिला को होगी फांसी!

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For the first time in independent India, a woman will be hanged!
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फांसी की सजा पाई शबनम के 12 साल के बेटे ने मां के लिए राष्‍ट्रपति से लगाई माफी की गुहार

मेरठ/न्यूज नाउ। आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी दी जायेंगी। मेरठ के पवन जल्लाद अमरोहा की शबनम को फांसी देने की तैयारी कर रहे हैं। पवन ने फांसी देने के लिए मथुरा जेल का निरीक्षण किया और फांसी के तख्त व लीवर की कमियों को जेल प्रशासन को बताया है।

पवन जल्लाद ने कुछ समय पहले निर्भया कांड के 4 दोषियों को फांसी दी थी और अब वो अमरोहा की शबनम को फांसी देने के लिए तैयार है। पवन का कहना है के इस तरह से निर्मम हत्या करने वाले और अपने परिवार के सात लोगों का खात्मा करने वाले दोषियों को फांसी की सजा होनी चाहिए।

देश की आजादी के बाद एक बार फिर मथुरा जेल में किसी महिला को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। फांसी की तारीख तय होना बाकी है।

करीब 22 वर्ष पूर्व यानी 6 अप्रैल 1998 में भी मथुरा जेल में हत्या के जुर्म में बुंदेलखंड की महिला रामश्री को फांसी लगाने की तैयारी की गई थी। लेकिन रामश्री ने जेल में एक बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद कुछ महिला संगठनों ने बच्चे की परवरिश को लेकर आवाज बुलंद की थी, जिस पर राष्ट्रपति ने उसकी फांसी को आजन्म कारावास में तब्दील कर दिया था। उस समय भी मथुरा का महिला फांसी घर सुर्खियों में आ गया था।

मथुरा जिला जेल में 1870 में महिला फांसीघर तैयार किया गया था। मथुरा में 150 साल पहले तैयार महिला फांसीघर में पिछले 73 साल से किसी महिला को फांसी नही दी गई है। अमरोहा की शबनम को बिना किसी रूकावट के फांसी के तख्त पर लटकाया जाता है, तो यह आजाद भारत में पहली महिला को फांसी होगी।

अमरोहा की रहने वाली शबनम ने 14 अप्रैल 2008 में अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के 7 लोगों की निर्ममता से हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड से पूरे उत्तर-प्रदेश में हड़कंप मच गया था। शबनम को सांत्वना देने के लिए मुख्यमंत्री भी मुरादाबाद पहुंची थी। लेकिन पुलिस तफ्तीश में दहाड़े मार-मारकर रोने वाली शबनम ही परिवार का खात्मा करने वाली निकली।
गुनहगार शबनम ने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर घर के 7 लोगों को चाय में जहर मिलाकर पिलाया और बाद में कुल्हाड़ी से काट डाला।

कॉल डिटेल में हत्याकांड वाली रात में सलीम और शबनम के बीच 52 बार बातचीत हुई, पुलिस ने फोन काल को आधार बनाकर सख्ती से शबनम और सलीम से पूछताछ की तो हत्याकांड से पर्दा उठ गया।

सुप्रीम कोर्ट ने शबनम की फांसी को बरकरार रखा तो उसने राष्ट्रपति के यहां मर्सी अपील दायर की, लेकिन राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका को खारिज कर दिया है। अमरोहा बावनखेड़ी की रहने वाली शबनम को जल्दी ही फांसी हो सकती है।
मेरठ के रहने वाले पवन जल्लाद के मुताबिक मथुरा जेल में फांसी की तैयारियां यहां शुरू हो गई हैं। जल्लाद का कहना है कि वह भी मानसिक रूप से फाँसी देने के लिए तैयार है। पवन के मुताबिक जुर्म करने वाला चाहे पुरूष हो या महिला उससे कोई फर्क नही पड़ता है। अपने परिवार का खात्मा करने वाली शबनम जैसे गुनहगार को सजा देकर उनके मन को शांति मिलेगी।
पवन अब तक दो बार मथुरा जिला जेल में महिला फांसी घर का निरीक्षण कर चुके है। वहां उन्हें फांसीघर जीर्णशीर्ण अवस्था में था, जिस तख्त पर दोषी को खड़ा करके फांसी दी जाती है वह टूटा हुआ था, लीवर में कमी थी। जिसके जेल प्रशासन ने बदलवा दिया है। हालांकि अभी शबनम के फांसी की तारीख तय नही हुई है, जल्दी ही तय हो सकती है। जिसके चलते मथुरा जेल में फांसी की तैयारी पूरी हो गई।

फांसी के फंदे के लिए विशेष रस्सी मनीला से मंगाई गई है, जबकि फंदा बक्सर में तैयार हो रहा है। पवन के मुताबिक लखनऊ से फांसी देने का लेटर मेरठ कारागार में आयेगा और आदेश मिलने के 72 घंटे पहले वह मथुरा जेल पहुंच जायेंगे।

12 साल के बेटे ने लगाई माफी की गुहार
उत्‍तर प्रदेश के अमरोहा के बानवखेड़ी हत्‍याकांड में फांसी की सजा पाने वाली शबनम के 12 साल के बेटे ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपनी मां के लिए माफी की गुहार लगाई है। वारदात के वक्‍त शबनम दो महीने की गर्भवती थी। इस बच्‍चे का जन्‍म जेल में हुआ था। गौरतलब है कि राष्‍ट्रपति शबनम की दया याचिका खारिज कर चुके हैं। अब अपनी मां की ओर से बेटे ने उनसे माफी की गुहार लगाई है।

शबनम आजाद भारत में फांसी की सजा पाने वाली पहली महिला अपराधी है। उसने 14 अप्रैल 2008 की रात अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्‍या कर दी थी। इस मामले में पकड़े जाने के बाद शबनम में जेल में अपने बच्‍चे को जन्‍म दिया जिसे बाद में उसके एक दोस्‍त ने गोद ले लिया। आज उस बच्‍चे की उम्र 12 साल है। उसने मां को फांसी दिए जाने की बात सुनी तो राष्ट्रपति से माफ़ी की गुहार लगाई। 12 साल की छोटी सी उम्र में बच्‍चे को अपनी मां के गुनाहों का अहसास है। उसे गोद लेने वाले शबनम के दोस्‍त ने बताया कि उसने राष्‍ट्रपति से अपनी मां के लिए माफी की मांग की है।

पिछले महीने हुई थी मां-बेटे की मुलाकात
फांसी की सजा पाने वाली शबनम से उसके बेटे की मुलाकात पिछले महीने की 21 तारीख को हुई थी। तब शबनम ने उसे टॉफी और कुछ रुपए दिए थे।

चाचा-चाची ने कहा-गुनहगार को जल्‍द दें फांसी
उधर, शबनम के चाचा और चाची ने उसे जल्‍द फांसी देने की मांग की है। राष्‍ट्रपति द्वारा शबनम और सलीम की दया याचिका खारिज किए जाने के बाद दोनों ने खुशी का इजहार किया। शबनम की चाची ने कहा-
‘हमें तो खून का बदला खून ही चाहिए। हम तो यही चाहते हैं कि इसे फांसी जल्द हो जाए। चाची ने कहा कि उस समय अगर हम भी घर में होते तो इसने हमें भी मार डाला होता। हम घटना के बाद आधी रात में यहां पहुंचे थे।

क्‍या करेंगे ऐसी लड़की की लाश लेकर
शबनम को फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद क्या उसका शव लेंगे? इस सवाल पर चाची ने कहा कि हम क्यों लेंगे? हम नहीं लेंगे। ऐसी लड़की की लाश लेकर हम क्‍या करेंगे? चाचा ने कहा कि शबनम ने जो किया, वो उसे भरना ही पड़ेगा।

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