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शरद पूर्णिमा 2020 : आज रात खास संयोग में होगी अमृत वर्षा, खीर का भोग लगाकर पाए मां लक्ष्मी की कृपा

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शरद पूर्णिमा 20202

जयपुर. शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी का पूजन कर पाएं समृद्धि, चांदनी में रखी खीर बनाएगी निरोगी।

शरद पूर्णिमा 20202

शरद ऋतु के प्रारंभ की प्रतीक शरद पूर्णिमा शुक्रवार शाम से शुरू होगी। मां लक्ष्मी की आराधना का दिन शुक्रवार और इस दिन बन रहे विशेष संयोग से जातकों को अल्प आराधना का भी अभीष्ट और अनंतकालीन फल प्राप्त होगा। इसके अलावा चंद्रमा की शीतल चांदनी में रखी गई खीर पर चंद्रमा की अमृत रूपी किरणें कई असाध्य रोगों का शमन करेंगी।

शरद पूर्णिमा की रात में चंद्रमा की रोशनी की तीव्रता और गणों को वैज्ञानिक भी बहुत फायदेमंद बताते हैं। चंद्रमा से निकलने वाली किरणों में दिव्य ऊर्जा समाहित रहती है और जब ये  किरणें प्रकृति से जुड़ी वस्तुओं और प्राणी जगत पर पड़ती हैं तो उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

श्री गलता पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना के लिए खीर का भोग लगाया जाता है। इस खीर को शीतल चांदनी में रात 10 से 12 बजे के बीच कभी भी केवल मात्र 30 मिनट के लिए रखा जाता है, तो यह अमृतमयी हो जाती है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार अश्विनी नक्षत्र, वज्र योग और चंद्रमा मेष राशि के संयोग में करें पूजा और खरीदारी

श्री गलता पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि शुक्रवार को शाम 5:23 बजे से पूर्णिमा का मान शुरू हो जाएगा, यह 31अक्टूबर की शाम 7 बजे तक रहेगा। शरद पूर्णिमा को शुक्रवार अश्विनी नक्षत्र, वज्र योग और चंद्रमा मेष राशि का संयोग बना रहा है।  जो शनिवार शाम तक रहेगी। हालांकि मां लक्ष्मी के भोग के लिए शुक्रवार को ही खीर बनाकर भोग लगाना होगा और चंद्रमा की रोशनी में रात में ही रखना होगा, वहीं शनिवार सुबह
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नदी, पवित्र जल स्रोतों, तालाब, कुंडों, कुओं अथवा घरों में स्नान करें।  नए अथवा स्वच्छ वस्त्र पहन कर मां लक्ष्मी की आराधना की तैयारी करें। अवधेशाचार्य महाराज ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्र देव अमृत की बूंदों की बारिश करते हैं। इसे परिवार के बीच में बांटकर खाया जाता है।

ऐसे पाएं मां लक्ष्मी से पूजा का अभीष्ट फल और आशीर्वाद

युवाचार्य स्वामी राघवेंद्राचार्य ने बताया कि देवी लक्ष्मी को लाल फूल, नैवेद्य, इत्र और अन्य सुगंधित चीजें अर्पित करें। मां लक्ष्मी का आह्वान कर उन्हें फूल, धूप (अगरबत्ती), दीप (दीपक), नैवेद्य, सुपारी और दक्षिणा आदि अर्पित करें। भक्तिभाव से देवी मां लक्ष्मी के मंत्र और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। आरती भी उतार कर खीर का भोग लगाएं, साथ ही खीर किसी ब्राह्मण को दान करना ना भूलें। अधिक फल प्राप्ति के लिए भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है।  

शरद पूर्णिमा खीर के चिकित्सकीय लाभ

वैद्य रामावतार शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद कहता है कि मौसम में अचानक बदलाव होना सभी के लिए नुकसानदेह होता है और इसी कारण लोग मौसमी बीमारियों से आसानी से ग्रसित हो जाते हैं। इन बचने के लिए हमें अपने खान-पान से लेकर कपड़े और रहन-सहन में बदलाव करना पड़ता है।   

वैद्य रामावतार शर्मा ने बताया कि दूध में लैक्टिक एसिड और अन्य पोषक तत्व होते हैं।  चंद्रमा की किरणों से खीर की गुणवत्ता और पौष्टिक हो जाती है, इसमें दिव्य ऊर्जा समाहित होने से यह कई प्रकार के रोगों का शमन करती है। इस खीर के सेवन से पेट की गैस, कब्ज और अन्य पेट संबंधी बीमारियां आसानी से दूर हो जाती हैं।  

  • शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी जाने वाली खीर के सेवन से पित्त  और मलेरिया का खतरा भी कम हो जाता है। 
  • इसके सेवन से श्वास संबंधी बीमारी दूर हो जाती है।
  •  इस खीर को खाने से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। 
  •  चर्म रोगों का भी यह खीर शमन करती है। 
  • इसके सेवन से नेत्र ज्योति भी बढ़ती है।

 
एक माह में दूसरी पूर्णिमा का संयोग, कर्ज से मुक्ति मिलेगी
पं. रमेश दाधीच ने बताया कि इस माह शुक्रवार को दूसरी पूर्णिमा पड़ रही है। पहली पूर्णिमा अक्टूबर के पहले हफ्ते में पुरुषोत्तम मास की थी। दूसरी, पूर्णिमा का मुहूर्त शुक्रवार को शाम सवा पांच बजे से है। इस कारण लोग शनिवार को ही उपवास रखेंगे। यह पूर्णिमा जातकों को कर्ज से मुक्ति दिलाएगी। अगले दिन यानी शनिवार को भी पूर्णिमा रहेगी, है, जो शाम 7 बजे तक रहेगी, लेकिन रात्रि में मुहूर्त नहीं है। इसलिए श्रद्धालु शनिवार सुबह ही स्नान व दान-अनुष्ठान करेंगे। 

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