Periods Health tips : मौसम का पीरियड्स पर असर, समझें- हेल्दी रहें

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हमारी दिनचर्या और मौसम रोज बदले हैं, आयु वर्ग की महिला के लिए पीरियड्स एक स्वभाविक प्रक्रिया है, डाॅ. सुलभा भार्गव आज बता रही हैं मौसम का पीरियड्स पर असर

हैल्थ डेस्क/न्यूज नाउ। मौसम का माहवारी से गहरा रिश्ता होता है। मौसम, पीरियड्स को कैसे और कितना प्रभावित कर सकता है? क्या मौसम के कारण किसी तरह से पीरियड्स के सायकल में रुकावट आ सकती है? ऐसे ही कई ऐसे सवाल हैं, जिनके बारे में अधिकतर बात करने से गुरेज करते हैं। कई बार पढ़ाई के लिए या घूमने के लिए गर्म इलाकों से ठंडे क्षेत्रों में प्रवास पर रहते हैं, उस दौरान मौसम का ध्यान रखा जाए जो आसानी से पीरिड्स टाइम को पास किया जा सकता है।

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुलभा भार्गव का कहना है कि हां, मौसम पीरियड्स के सायकल को प्रभावित करता है। सबसे ज्यादा असर सर्दियों में होता है। ठंड के कारण पीरियड्स और प्रीमैंस्ट्रुअल तनाव बढ़ जाता है।  सर्दियों में पीरियड्स बहुत सी युवतियों-महिलाओं के लिए अत्यधिक बुरे हो सकते हैं। सर्दियों में अधिक ठंड के कारण महिलाएं बहुत आसानी से बीमार हो सकती हैं। कई बार महिलाओं का मूड भी तापमान की तरह गिरता रहता है और उन्हें ऐसा लगता है सर्दी का मौसम उन के पीरियड्स सायकल पर बहुत ज्यादा असर डाल रहा है, इसीलिए महिलाएं अकसर सर्दियों में पीरियड्स में परेशानी बढ़ने की शिकायत करती हैं।

डॉ. भार्गव का कहना है कि हमारे व्यवहार, परिवर्तन का असर भी हमारे पीरियड्स पर पड़ता है। सर्दियों में हमारे व्यावहारिक जीवन में काफी बदलाव देखने को मिलता है जैसे कि एक्सरसाइज कम करना, हाई फैट व शुगरी फूड खाना, शराब का सेवन अधिक करना. इस तरह की जीवनशैली पीरियड्स में होने वाली तकलीफ और पीएमएस को बढ़ा सकती है. मूड, मैटाबोलिज्म और मैंस्ट्रुएशन तीनों मौसम बदलने के साथ बदलते हैं। ऐसे में बदलते मौसम के साथ कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

 आइए, जानते हैं वे महत्त्वपूर्ण बातें, जो सर्दियों में पीरियड्स सायकल में होने वाले बदलावों से बेहतर तरीके से निबटने में मदद कर सकती हैं।

1. पीरियड्स सायकल की अवधि

सर्दी पीरियड्स सायकल की अवधि को प्रभावित करती है। हारमोन स्राव में बढ़ोतरी, ओव्युलेशन की बढ़ती फ्रीक्वैंसी और सायकल का कम होना, जहां गर्मियों की तुलना में 0.9 दिनों का होता है, वहीं सर्दियों में पीरियड्स सायकल ठंड की वजह से बिगड़ जाता है। एक रिसर्च के अनुसार गर्मियों में अंडाशय अधिक सक्रिय होता है। सर्दियों में ओव्युलेशन स्तर 97% से घट कर 71% रह जाता है। लंबे पीरियड्स सायकल और घटे हुए ओव्युलेशन के कारण पीरियड्स का दौर परेशानी भरा हो सकता है।

2. महिलाओं के  शरीर पर धूप का असर

धूप यानी सूर्य की किरणें विटामिन डी और डोपामाइन दोनों ही बनाने में मदद करती हैं। इन के बिना जो मूड स्विंग्स पीरियड्स में महसूस होता है, वह बढ़ सकता है। इससे उबर पाना मुश्किल हो सकता है। धूप प्लेजर, मोटिवेशन और कंस्ट्रेशन बढ़ाती है।  धूप के कारण महिलाओं के  शरीर में फौलिक स्टिम्युलेटिंग हारमोन के स्राव बढ़ जाता है। यह हारमोन शरीर को साधारण बनाता है। महिलाएं गर्मियों की तुलना में सर्दियों में ज्यादा ओव्युलेट करती हैं। इससे उन के पीरियड्स लंबे समय तक चलते हैं।

3. प्री मैंस्ट्रुअल सिंड्रोम का स्वभाव व शरीर पर प्रभाव

पीरियड्स शुरू होने से पहले जो बदलाव या लक्षण महिलाओं में दिखाई देते हैं, उन्हें प्री मैंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहते हैं। इस कारण महिलाओं को चिड़चिड़ापन, सूजन, चिंता, एंग्जाइटी और डिप्रेशन महसूस होता है। सर्दियों में महिलाएं अधिकतर घरों में ही रहती हैं। जिस से वे खुद को ज्यादा सहज महसूस करती हैं, दूसरी ओर धूप की कमी यानी विटामिन डी और कैल्सियम की कमी के कारण उनका पीएमएस और बढ़ जाता है और इसी कारण वे ज्यादा परेशान होने लगती हैं।  ऐसे समय में खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। उच्च कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन और नियमित रूप से एक्सरसाइज करने से पीएमएस के लक्षणों में सुधार आ सकता है।

4. पीरियड्स में होने वाला दर्द और मौसम का असर

सर्दियों  में पीरियड्स का दर्द अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि ठंड के कारण रक्तवाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं। ठंड के कारण रक्तवाहिनियों में अवरोध पैदा हो जाता है और रक्त प्रवाह में बाधा आती है। इसीलिए सर्दियों में दर्द ज्यादा होता है. इसके लिए गरम पानी की बोतल या हीटिंग पैड का यूज करके पीरियड्स के दर्द को कम किया जा सकता है।

5. ठंड के कारण प्रभावित होता है हारमोनल इंबैलेंस

हारमोनल इंबैलेंस सर्दियों में होने वाली एक और समस्या है। ठंडे मौसम के कारण सर्दियों में धूप कम समय के लिए निकलती है और ज्यादा प्रभावी भी नहीं होती है। कम धूप न केवल ऐंडोक्रीन सिस्टम को प्रभावित करती है, बल्कि थायराइड की गति को भी धीमा कर देती है। धीमे थायराइड से मैटाबोलिज्म भी धीमा हो जाता है। इस का असर महिलाओं के मैटाबोलिज्म और पीरियड्स पर पड़ता है, जब तक कि शरीर खुद को मौसम के अनुसार नहीं ढाल लेता है।

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