August 1, 2021

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विश्वभारती यूनिवर्सिटी के बारें में सौ साल पूरे होने पर बोले PM मोदी, ‘हर सब भारतवासी के लिए गर्व की बात’

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न्यूज नाउ/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं। इस चुनावी मौसम में सियासी पारा पूरी तरह बढ़ चुका है। इन सब के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के विश्व भारती यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी का संबोधन सुबह 11 बजे शुरू हुआ। समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी मौजूद थे। 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि विश्वभारती की सौ सालों की यात्रा बहुत विशेष है। विश्वभारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है। भारत के लिए गुरुदेव ने जो सपना देखा था, उस सपने को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला यह एक तरह से आराध्य स्थल है।

पीएम बोले कि विश्वभारती विश्वविद्यालय के 100 वर्ष होना प्रत्येक भारतवासी के लिए बहुत ही गर्व की बात है और यह उनके लिए भी सुखद है कि आज के दिन इस तपोभूमि का पुण्य स्मरण करने का अवसर उन्हें मिल रहा है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘हमारा देश, विश्व भारती से निकले संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है। भारत आज इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पैरिस समझौते के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है।

रवींद्रनाथ टैगोर को भी  किया याद

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी और ये धारा अंतर्मुखी नहीं थी। वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी। उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे। आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए: विश्व-भारती यानी मां भारती और विश्व के साथ समन्वय।’

उन्होंने आगे कहा, ‘विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।’

विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम पर  कहा

विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने कहा, ‘जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी। भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी।

भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को भक्ति आंदोलन ने मजबूत करने का काम किया था। भक्ति युग में, हिंदुस्तान के हर क्षेत्र, हर इलाके, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में हमारे संतों ने, महंतों ने, आचार्यों ने देश की चेतना को जागृत रखने का प्रयास किया।

  भक्ति का ये विषय तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक महान काली भक्त श्रीरामकृष्ण परमहंस की चर्चा ना हो। वे महान संत, जिनके कारण भारत को स्वामी विवेकानंद मिले। स्वामी विवेकानंद भक्ति, ज्ञान और कर्म, तीनों को अपने में समाए हुए थे।’

आजादी की लड़ाई में विश्वविद्यालयों का रहा महत्वपूर्ण योगदान

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘भक्ति आंदोलन के सैकड़ों वर्षों के कालखंड के साथ-साथ देश में कर्म आंदोलन भी चला। भारत के लोग गुलामी और साम्राज्यवाद से लड़ रहे थे। चाहे वह छत्रपति शिवाजी हों, महाराणा प्रताप हों, रानी लक्ष्मीबाई हों, कित्तूर की रानी चेनम्मा हों, भगवान बिरसा मुंडा का सशस्त्र संग्राम हो।

अन्याय और शोषण के विरुद्ध सामान्य नागरिकों के तप-त्याग और तर्पण की कर्म-कठोर साधना अपने चरम पर थी। ये भविष्य में हमारे स्वतंत्रता संग्राम की बहुत बड़ी प्रेरणा बनी।

विश्वविद्यालयों ने वैचारिक आंदोलन को ऊर्जा देने का काम किया

उन्होंने कहा, ‘इन शिक्षण संस्थाओं ने भारत की आजादी के लिए चल रहे वैचारिक आंदोलन को नई ऊर्जा दी, नई दिशा दी, नई ऊंचाई दी। भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए, ज्ञान आंदोलन ने बौद्धिक मजबूती दी और कर्म आंदोलन ने हमें अपने हक के लिए लड़ाई का हौसला और साहस दिया। सैकड़ों वर्षों के कालखंड में चले ये आंदोलन त्याग, तपस्या और तर्पण की अनूठी मिसाल बन गए थे। इन आंदोलनों से प्रभावित होकर हज़ारों लोग आजादी की लड़ाई में बलिदान देने के लिए आगे आए।’

बता दें कि सन् 1921 में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने विश्व भारती यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। यह देश की सबसे पुरानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। 

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