September 23, 2021

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Sonia Gandhi With Madhav Rao Scindia Alone Party Who Called Her With Name Got Feedback On Important Issues-सोनिया गांधी को नाम से बुलाने वाले कांग्रेस के इकलौते नेता थे माधव राव सिंधिया, अहम मुद्दों पर लेती थीं राय

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ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधव राव सिंधिया का साल 2001 में प्लेन दुर्घटना में निधन हो गया था। माधव राव की गिनती कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती थी। माधव राव, सोनिया गांधी के भी करीबी नेताओं में से एक थे। वहीं, सोनिया गांधी भी उन पर पूरा विश्वास करती थीं। साथ ही उनसे कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा करती थीं। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राशिद किदवई ने अपनी किताब ‘द हाउस ऑफ सिंधियाज: ए सागा ऑफ पावर, पॉलिटिक्स एंड इंट्रिग’ में इसका विस्तार से जिक्र किया है।

सोनिया को नाम से बुलाते थे सिंधिया: राशिद किदवई लिखते हैं, माधव राव सिंधिया तेज तर्रार नेता थे। साथ ही उनका सोनिया गांधी से तालमेल भी बहुत अच्छा था। माधव राव कांग्रेस के ऐसे इकलौते नेता थे जो सोनिया गांधी को उनके नाम ‘सोनिया’ से बुलाया करते थे। जबकि पार्टी के अन्य मंचों पर वह सोनिया गांधी को ‘सोनिया जी’ कहकर बुलाया करते थे। सोनिया गांधी के साथ भी ऐसा ही था और वह भी उन्हें ‘माधव’ कहकर बुलाया करती थीं। सोनिया गांधी अक्सर उन्हें चाय और कॉफी पर बुला लिया करती थीं और कई राजनीतिक मुद्दों पर उनकी राय लिया करती थीं।

किदवई आगे बताते हैं, माधव राव सिंधिया सोनिया गांधी को भारत में आने और 1968 में राजीव गांधी से शादी करने के समय से ही जानते थे। माधव राव ये भलीभांति जानते थे कि इटली में जन्मी एक महिला के लिए भारत में प्रधानमंत्री की कुर्सी कभी भी खाली नहीं हो सकती और ऐसी स्थिति एक दिन तो जरूर आएगी। ऐसा नहीं था कि सोनिया गांधी ने इसकी चर्चा माधव राव सिंधिया से नहीं की थी। साल 1999 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक वोट से एनडीए की सरकार गिरने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मिलना शुरू कर दिया था।

अटल बिहार को हराया था चुनाव: अगर ऐसा होता तो सोनिया गांधी ही उसकी नेता बनतीं। माधव राव सिंधिया को भी ये बात पता थी कि वे एक ऐसे इंसान की खोज करतीं जो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ सके और उनका करीबी हो। माधव राव सिंधिया मानव संसाधन मंत्री और रेल मंत्री रह चुके थे और यहां उन्होंने खूब वाहवाही भी लूटी थी। किदवई बताते हैं, माधव राव और गांधी परिवार एक-दूसरे के करीब पहली बार नहीं आए थे। इंदिरा गांधी अपने अंतिम दिनों में राजीव गांधी और माधव राव को अक्सर मिलने के लिए बुलाया करती थीं।

साल 1984 के चुनाव में ये देखने को भी मिला था जब ग्वालियर से कांग्रेस के टिकट पर माधव राव सिंधिया को मैदान में उतारा गया था और सामने अटल बिहार वाजपेयी मैदान में थे। अटल बिहारी साफ-छवि वाले नेता थे और माधव राव की मां विजयाराजे सिंधिया भी उनका समर्थन कर रही थीं। खैर, चुनाव के नतीजों में माधव राव सिंधिया को ऐतिहासिक जीत मिली और अटल बिहारी वाजपेयी को हार का सामना करना पड़ा था।



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