September 22, 2021

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When under world don haji mastan filled Rukhsana Sultana’s car with foreign soap, only smugglers used to sell it – जब अंडर वर्ल्ड डॉन ने विदेशी साबुन से भर दी रुखसाना सुल्‍ताना की कार, तब स्मगलर्स ही इसे बेचते थे

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रुखसाना सुल्ताना… संजय गांधी की करीबी और हमराज। इमरजेंसी के दौर में जब संजय ने 5 सूत्रीय कार्यक्रम का ऐलान किया तो मुस्लिम महिलाओं को नसबंदी के लिए राजी करने की जिम्मेदारी रुखसाना को सौंपी। यूं तो रुखसाना का सियासत से कोई खास वास्ता नहीं था। वो एक बुटीक चलाती थीं। लेकिन बाद में जब वो संजय गांधी के करीब आईं तो सियासी गलियारों में उनकी एक अलग हनक देखने को मिली। सुल्ताना अपनी लैविश लाइफ लाइफस्टाइल को लेकर भी चर्चा में रहा करती थीं।

तस्करों से खरीदती थीं साबुन: वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने अपनी हालिया किताब ‘अ रूड लाइफ: द मेम्योर’ में रुखसाना सुल्ताना और अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। पेंगुइन से प्रकाशित इस किताब में सांघवी लिखते हैं, सुल्ताना कैमी कंपनी का साबुन इस्तेमाल करती थीं, जो उस वक्त भारत में नहीं मिलता था और स्मगलिंग के जरिए यहां लाया जाता था। सुल्ताना भी तस्करों से ही साबुन मंगवाया करती थीं।

एक बार रुखसाना मुंबई साबुन खरीदने पहुंचीं। उन्होंने बाजार के बाहर अपनी कार पार्क की और मार्केट में चली गईं। तमाम जगह पता किया लेकिन पता चला कि कुछ दिनों से स्मगलर्स के पास भी वो साबुन नहीं आ रहा है। निराश होकर जब वो बाहर निकलीं तो दूर से ही देखा कि उनकी कार के आसपास भीड़ लगी हुई है। पहले अंदेशा हुआ कि कुछ गड़बड़ हो गया है। वे तेजी से अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ीं।

हाजी मस्तान ने कार में रखवा दिये सैकड़ों साबुन: नजदीक पहुंचीं तो निगाह कार की पिछली सीट और ड्राइवर के बगल वाली सीट पर पड़ी। सीट पर कैमी कंपनी के सैकड़ों साबुन पड़े हुए थे। कार के नजदीकी ही सफेद कपड़ों में एक शख्स खड़ा था और तमाम लोग कौतूहल से उसको देख रहे थे। लेकिन वो शख़्स रुखसाना की ही तरफ देख रहा था। उसने मुस्कुराते हुए अपना परिचय दिया ‘मेरा नाम हाजी मस्तान है…।’

शिफॉन साड़ी और चश्मा थी पहचान: रुखसाना सुल्ताना अक्सर शिफॉन साड़ी और बड़े चश्मे में नजर आती थीं। चश्मा एक तरीके से उनकी पहचान बन गई थी। हालांकि इस चश्मे के चक्कर में वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह एक बार पिटते-पिटते बची थीं। दरअसल, तवलीन सिंह पुरानी दिल्ली के इलाके में कवरेज के सिलसिले में गई थीं।

उन्होंने भी चश्मा लगा रखा था। वहां लोग नसबंदी अभियान को लेकर रुखसाना सुल्ताना से पहले से ही नाराज चल रहे थे। तवलीन सिंह को चश्मे में देखकर उन्हें लगा कि यही रुखसाना हैं। भीड़ ने उन्हें घेर लिया। बाद में वो बहुत मुश्किल से अपना पीछा छुड़ाकर वहां से निकल पाई थीं।



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